सीहोर भैरुंदा गेहूं खरीदी में गड़बड़ी के आरोप, किसानों में आक्रोश

सीहोर| जिले के भैरुंदा क्षेत्र से सामने आई खबर ने गेहूं खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीहोर गेहूं खरीदी अनियमितता मामला में किसानों ने आरोप लगाया है कि तुलाई से लेकर सैंपल प्रक्रिया तक नियमों की अनदेखी हो रही है। धर्मकांटों से तौल, हर ट्रॉली में कटौती और बिना अनुमति डंपिंग जैसे आरोपों ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है।

तुलाई में गड़बड़ी और कटौती के आरोप

भैरुंदा तहसील के उपार्जन केंद्रों पर किसानों का कहना है कि तय नियमों के अनुसार जहां 6 तौल कांटे होने चाहिए, वहां केवल 2-3 कांटों से काम चलाया जा रहा है। इससे न केवल अव्यवस्था बढ़ रही है, बल्कि जल्दबाजी में खरीदी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप भी लग रहे हैं। किसानों के अनुसार एक ट्रॉली में लगभग 50 क्विंटल गेहूं होता है, लेकिन तुलाई के दौरान प्रति क्विंटल 500 ग्राम तक कम दर्ज किया जा रहा है। इस हिसाब से हर ट्रॉली में करीब 25 किलो गेहूं का अंतर सामने आ रहा है। यदि प्रतिदिन बड़ी संख्या में ट्रॉलियां केंद्रों पर पहुंच रही हैं, तो यह अंतर हजारों क्विंटल तक पहुंच सकता है। किसानों का सवाल है कि यह गायब अनाज आखिर कहां जा रहा है और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।

सैंपल और डंपिंग पर भी सवाल

मामले में सैंपल प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नियम के अनुसार जहां 400-500 ग्राम सैंपल लिया जाना चाहिए, वहां 5 किलो तक गेहूं लेने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसके अलावा बिना अनुमति गोदामों में गेहूं डंप करने के आरोप भी लगे हैं। किसानों का कहना है कि बिना स्लॉट बुकिंग तुलाई और देर रात तक डंपिंग जैसी गतिविधियां पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं। जियो-टैगिंग व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है, क्योंकि अलग-अलग किसानों का गेहूं मिलाकर रखा जा रहा है। इससे गुणवत्ता जांच और ट्रेसबिलिटी दोनों पर असर पड़ रहा है। हालांकि संबंधित अधिकारी सभी प्रक्रियाओं को नियमों के अनुरूप बता रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग नजर आ रही है।

सीहोर के भैरुंदा क्षेत्र में सामने आया यह मामला गेहूं खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि जल्द ही जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो किसानों का आक्रोश बढ़ सकता है और यह मुद्दा बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

ब्यूरो रिपोर्ट: देवेश शर्मा

यह भी पढ़े: सतना अस्पताल मामला, HIV संक्रमित रक्त जांच के लिए टास्क फोर्स

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Srota Swati Tripathy

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