
जबलपुर/शेख सिकंदर की रिपोर्ट: नगर निगम में शिकायत निस्तारण व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नगर निगम के विभिन्न जोनों में दर्ज कराई गई शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं किया जा रहा है, बल्कि कई मामलों में शिकायतों से जुड़ी फाइलें और दस्तावेज कथित रूप से कचरे और नाली किनारे पड़े हुए देखे गए हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बार-बार आवेदन देने और संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि नाली सफाई, कचरा प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं और जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
स्थानीय नागरिकों का यह भी आरोप है कि व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है और प्रभावशाली लोगों या जान-पहचान वालों की शिकायतों पर ही त्वरित कार्रवाई की जाती है, जबकि आम नागरिकों को लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कुछ लोगों ने इसे “जंगल राज जैसी स्थिति” तक बता दिया है, हालांकि यह उनकी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया और नाराजगी को दर्शाता है।
इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पर कुछ फोटो और वीडियो भी वायरल होने की बात कही जा रही है, जिनमें कथित तौर पर नगर निगम से जुड़े दस्तावेज और कचरे के बीच पड़े कागजात दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन वीडियो और तस्वीरों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हो पाई है। वहीं, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने कई बार मीडिया के माध्यम से भी अपनी आवाज उठाई, लेकिन अब तक स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिखा है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिक जवाब देकर मामले को टाल देते हैं।
फिलहाल नगर निगम प्रशासन की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि प्रशासन की ओर से कोई बयान आता है तो स्थिति और स्पष्ट होगी। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि शिकायत निस्तारण प्रणाली को मजबूत किया जाएगा और नागरिक समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
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