
सागर: प्रशासनिक लापरवाही और न्यायिक प्रक्रिया में देरी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केसली तहसील के ग्राम महुआखेड़ा की रहने वाली वृद्ध महिला भूरीबाई घोषी पिछले कई वर्षों से अपनी जमीन के अधिकार के लिए संघर्ष कर रही हैं। हैरानी की बात यह है कि जिला अदालत से अपने पक्ष में फैसला आने के बाद भी उन्हें आज तक अपनी जमीन का वास्तविक कब्जा और सीमांकन नहीं मिल पाया है। बुजुर्ग महिला अब भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
जानकारी के मुताबिक भूरीबाई घोषी के स्वर्गीय पति कपूर सिंह घोषी ने वर्ष 1977-78 में ग्राम महुआखेड़ा में करीब 25 एकड़ कृषि भूमि खरीदी थी। पति की मृत्यु के बाद जमीन को लेकर विवाद शुरू हो गया और मामला अदालत पहुंच गया। वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद 24 अगस्त 2023 को जिला एवं सत्र न्यायालय सागर ने भूरीबाई के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत के आदेश के बाद वृद्ध महिला को उम्मीद थी कि अब उन्हें उनकी जमीन का अधिकार आसानी से मिल जाएगा।
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अदालती आदेश मिलने के बाद भूरीबाई ने केसली तहसील कार्यालय में जमीन के सीमांकन और पैमाइश के लिए आवेदन दिया। महिला का आरोप है कि तहसीलदार के निर्देश पर उन्होंने सीमांकन के लिए निर्धारित 500 रुपये की सरकारी फीस भी जमा की, लेकिन इसके बावजूद राजस्व विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि सरकारी रसीद कटने के बाद भी अधिकारी केवल आश्वासन देते रहे और आज तक जमीन की नाप नहीं कराई गई।
भूरीबाई ने बताया कि वह इस उम्र में लाठी के सहारे करीब 35 बार तहसील कार्यालय के चक्कर लगा चुकी हैं। हर बार उन्हें “आज-कल” कहकर लौटा दिया जाता है। पटवारी से लेकर अन्य राजस्व अधिकारी तक केवल तारीखें देते रहे, लेकिन जमीन के सीमांकन के लिए कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा। लगातार उपेक्षा और प्रशासनिक लापरवाही से परेशान होकर बुजुर्ग महिला मंगलवार को सागर कलेक्ट्रेट पहुंचीं और जनसुनवाई में अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा रखी।
जनसुनवाई के दौरान भूरीबाई ने अधिकारियों को आवेदन सौंपते हुए कहा कि उनके पति ने खून-पसीने की कमाई से यह जमीन खरीदी थी, लेकिन अब अपने ही अधिकार के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से जल्द सीमांकन कराकर न्याय दिलाने की मांग की। मामले को लेकर कलेक्ट्रेट के अधिकारियों ने महिला की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित राजस्व अमले को निर्देशित किया जाएगा और नियमानुसार सीमांकन की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
यह मामला न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अदालत से फैसला मिलने के बाद भी आम लोगों को अपने अधिकार पाने के लिए कितना लंबा संघर्ष करना पड़ता है। अब देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद भूरीबाई घोषी को आखिर कब तक उनकी जमीन का वास्तविक हक मिल पाता है।
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