
उमरिया/राकेश दर्दवंशी की रिपोर्ट: कृषि उपज मंडी में इन दिनों दलहनी फसलों की आवक तेज हो गई है, लेकिन इसी के साथ किसानों की परेशानियां भी बढ़ती नजर आ रही हैं। चना, मसूर सहित अन्य दलहनी फसलों की बिक्री के दौरान किसानों से प्रति क्विंटल 100 रुपए तक की अवैध वसूली किए जाने के आरोप सामने आए हैं।
किसानों का कहना है कि जहां एक ओर सरकार किसानों की उपज का सही दाम दिलाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए खरीदी केंद्रों पर फसल की बिक्री सुनिश्चित कर रही है, वहीं दूसरी ओर मंडी में खरीदी प्रभारी और कुछ व्यापारियों की मिलीभगत से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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आरोप है कि किसान अपनी फसल बेचने आते हैं, लेकिन उन्हें लंबी कतारों में गर्मी में इंतजार करना पड़ता है, जबकि कुछ व्यापारी किसान बनकर पहले ही अपनी फसल बेचकर निकल जाते हैं। इसी दौरान प्रति क्विंटल 100 रुपए की अवैध वसूली की जा रही है, जिससे किसान वर्ग में भारी नाराजगी है।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले की शिकायत खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से कई बार की जा चुकी है, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है। उनका कहना है कि शिकायतों का अंबार लगा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कार्यवाही शून्य बनी हुई है।
ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि यह सब मिलीभगत के कारण हो रहा है, जिसमें खरीदी केंद्र प्रभारी और संबंधित लोग शामिल हैं। किसानों का कहना है कि वे दिन-रात मेहनत कर फसल तैयार करते हैं, लेकिन मंडी में पहुंचने के बाद उन्हें इस तरह की वसूली का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है। किसानों ने प्रशासन से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में किसी भी किसान के साथ इस तरह की अनियमितता न हो सके।
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