
तमिलनाडु में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर एक और दुखद घटना सामने आई है, जहां एक छात्रा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि छात्रा ने अपने अंतिम संदेश में व्हाट्सएप पर लिखा था कि उसे दोबारा NEET परीक्षा देने से डर लग रहा है। इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते मानसिक दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। राज्य में पिछले दो दिनों के भीतर यह तीसरी ऐसी घटना बताई जा रही है, जिसने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर नई बहस छेड़ दी है।
परिजनों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार छात्रा लंबे समय से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। वह अपने प्रदर्शन और भविष्य को लेकर काफी तनाव में थी। बताया जा रहा है कि परीक्षा में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद वह दोबारा तैयारी करने को लेकर मानसिक दबाव महसूस कर रही थी। उसके द्वारा छोड़े गए संदेश ने यह संकेत दिया कि वह परीक्षा से जुड़ी आशंकाओं और भविष्य की अनिश्चितताओं से जूझ रही थी। घटना के बाद परिवार और स्थानीय समुदाय में शोक का माहौल है।
तमिलनाडु में NEET परीक्षा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रही है। राज्य के कई राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन यह तर्क देते रहे हैं कि यह परीक्षा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। हाल के वर्षों में NEET से जुड़े तनाव के कारण आत्महत्या की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। रिपोर्टों के अनुसार राज्य में इस परीक्षा से जुड़ी आत्महत्याओं की संख्या अब 11 तक पहुंचने की चर्चा है, जिससे परीक्षा प्रणाली की संवेदनशीलता और मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र पर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के दौर में छात्रों को केवल शैक्षणिक मार्गदर्शन ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक सहयोग की भी आवश्यकता होती है। परिवार, स्कूल, कोचिंग संस्थान और प्रशासन को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए जहां छात्र असफलता के डर से टूटने के बजाय सहायता मांग सकें। यह घटना केवल एक छात्रा की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि उस व्यापक दबाव की ओर संकेत करती है जिसका सामना लाखों विद्यार्थी अपने करियर और भविष्य को लेकर कर रहे हैं।
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