
दमोह: जिला अस्पताल की दवा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बुधवार सुबह करीब 10 बजे जिला अस्पताल के दवा स्टोर रूम का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एक्सपायरी डेट की दवाइयां, दवाइयों से भरे बंद फ्रीजर, दवा स्टॉक में विसंगतियां और अस्पतालों से आई दवा मांग के दर्जनों पत्र लंबित मिलने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने स्टोर रूम के दो कर्मचारियों को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सीएमएचओ कार्यालय के निरीक्षण में 16 अधिकारी-कर्मचारी अनुपस्थित पाए जाने पर उनके तीन दिन का वेतन काटने के निर्देश भी दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ डॉ. राकेश राय, सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल सहित अन्य चिकित्सक और अधिकारी मौजूद रहे।
ग्रामीण अस्पतालों में दवा नहीं, स्टोर में लंबित पड़े मांग पत्र
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान कई सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आई थीं। डॉक्टरों का कहना था कि उन्होंने दवाइयों की मांग भेजी है, लेकिन दमोह से आपूर्ति नहीं हो रही है। इसके कारण मरीजों को मजबूरी में बाजार से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। इसी स्थिति को देखते हुए कलेक्टर ने जिला अस्पताल के स्टोर रूम का निरीक्षण किया।
जांच के दौरान सामने आया कि वर्ष 2025 के तीन डिमांड पत्र और वर्ष 2026 के 39 डिमांड पत्र लंबित पड़े हैं। कलेक्टर ने सवाल उठाया कि जब दवाइयां अस्पतालों में उपलब्ध हैं, तो जरूरतमंद मरीजों तक समय पर क्यों नहीं पहुंचाई जा रहीं। उन्होंने कहा कि आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर होनी चाहिए और ऐसी सामग्री को 24 घंटे के भीतर संबंधित अस्पतालों तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
एक्सपायरी दवाइयां और बंद फ्रीजर में रखी मिलीं दवाएं
निरीक्षण के दौरान कई दवाइयां एक्सपायरी डेट की मिलीं। इसके अलावा जिन दवाइयों को निर्धारित तापमान पर फ्रीजर में रखा जाना था, वे दवाइयां बंद पड़े फ्रीजरों के अंदर रखी मिलीं। कलेक्टर ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि तापमान नियंत्रित रखने वाली दवाइयों को बंद फ्रीजर में रखने से उनकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसी दवाइयों का उपयोग मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
स्टॉक में मिली विसंगतियां
दवा स्टॉक की जांच में छह प्रकार की वस्तुओं में विसंगतियां पाई गईं। कुछ दवाइयां रिकॉर्ड से अधिक और कुछ कम मिलीं। कलेक्टर ने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुसार दवाइयों की आवक और जावक का पूरा रिकॉर्ड एमपी औषधि पोर्टल के माध्यम से दर्ज होना चाहिए, ताकि किसी भी समय स्टॉक का सत्यापन किया जा सके। निरीक्षण में मिली अनियमितताओं की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
सीएमएचओ कार्यालय में 16 कर्मचारी गैरहाजिर
जिला अस्पताल के स्टोर रूम के बाद कलेक्टर ने सीएमएचओ कार्यालय का भी निरीक्षण किया। इस दौरान 16 अधिकारी और कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। कलेक्टर ने सभी अनुपस्थित कर्मचारियों के तीन दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए। उन्होंने सीएमएचओ को स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं में सुधार करने और अधिकारियों-कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
नवजात की मौत की शिकायत लेकर कलेक्टर के पास पहुंचा युवक
निरीक्षण के दौरान पुष्पेंद्र राठौर नाम का एक युवक कलेक्टर के पास पहुंचा और उसने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। युवक ने बताया कि उसकी गर्भवती पत्नी की डिलीवरी के बाद नवजात शिशु की मौत हो गई थी। उसका आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ द्वारा समय पर उचित इलाज नहीं किया गया। शिकायत सुनने के बाद कलेक्टर ने मामले की जांच के लिए सिविल सर्जन को निर्देश दिए हैं।
दोबारा निरीक्षण की चेतावनी, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को समय पर दवाइयां और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए। निरीक्षण में जिस प्रकार की अनियमितताएं सामने आई हैं, उन्हें गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को व्यवस्था में तत्काल सुधार करने के निर्देश देते हुए कहा कि वे दोबारा निरीक्षण करेंगे। यदि इसके बाद भी लापरवाही या अनियमितता मिली तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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