
कनाडा। G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने होर्मुज क्षेत्र में भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्री मार्गों पर काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा केवल भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक समुदाय की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नेताओं के बीच इस विषय पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता बताई और समुद्री सुरक्षा को वैश्विक व्यापार एवं मानवीय सरोकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर न केवल क्षेत्रीय देशों पर बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने हाल की घटनाओं में भारतीय नागरिकों और नाविकों की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
G7 सम्मेलन के दौरान कई वैश्विक नेताओं की मौजूदगी रही, जिनमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump भी शामिल थे। इस दौरान समुद्री सुरक्षा, वैश्विक संघर्ष, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। भारत ने स्पष्ट किया कि वह अपने नागरिकों और समुद्री क्षेत्र में कार्यरत भारतीयों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में वैश्विक सहयोग का समर्थन करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी द्वारा यह मुद्दा उठाना महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। भारत विश्व के सबसे बड़े समुद्री कार्यबल वाले देशों में शामिल है और बड़ी संख्या में भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर कार्यरत हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की विदेश नीति और मानवीय प्राथमिकताओं का अहम हिस्सा बन गया है। G7 मंच से उठाई गई यह चिंता आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर नई चर्चाओं को जन्म दे सकती है।
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