
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में हुए पुनर्मतदान के नतीजों ने राज्य की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर कर दिया है। रविवार को घोषित हुए चुनावी परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने 1,09,021 मतों के ऐतिहासिक और भारी अंतर से जीत दर्ज की है। इस चुनाव की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि साल 2011 से लगातार इस सीट पर काबिज रहने वाली सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे स्थान पर खिसक गए और अपनी जमानत तक नहीं बचा सके।
पुनर्मतदान से ठीक कुछ दिन पहले जहांगीर खान ने अचानक चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया था, जिसे टीएमसी ने उनका व्यक्तिगत निर्णय बताया था। हालांकि, उस तकनीकी चरण में नामांकन वापस लेना कानूनी रूप से संभव नहीं था, जिसके कारण उनका नाम और चुनावी प्रतीक ईवीएम (EVM) में दर्ज रहा और कुल 2.36 लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में उन्हें महज 7,783 वोट ही मिल सके।
मतगणना के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भाजपा के देबांग्शु पांडा को कुल 1,49,666 मत प्राप्त हुए, जिसने उन्हें जीत के शीर्ष पर पहुंचा दिया। वहीं, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के उम्मीदवार शंभू नाथ कुर्मी 40,645 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी अब्दुर रज्जाक मोल्ला को 10,084 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे।
पश्चिम बंगाल में भाजपा के वोट शेयर में जबरदस्त उछाल
इस चुनावी मुकाबले में भाजपा के वोट शेयर में जबरदस्त उछाल देखा गया है। पार्टी ने इस पुनर्मतदान में रिकॉर्ड 71.2 प्रतिशत मत हासिल किए, जो साल 2021 के विधानसभा चुनाव में मिले 36.75 प्रतिशत के मुकाबले लगभग दोगुना है। इसके विपरीत, साल 2021 में करीब 57 प्रतिशत मतों के साथ बड़ी जीत दर्ज करने वाली टीएमसी का ग्राफ इस बार गिरकर महज 3.7 प्रतिशत पर सिमट गया। इस शानदार जीत के बाद निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड में राज्य विधानसभा के भीतर भाजपा की सीटों की संख्या बढ़कर 208 हो गई है। हालांकि, इससे प्रभावी विधानसभा संख्या में कोई तकनीकी बदलाव नहीं आया है क्योंकि संबंधित अधिकारी ने पहले नंदीग्राम सीट खाली करके भवानीपुर सीट को बरकरार रखा था।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जीत को जनता के नाम किया
इस बंपर जीत और सुबह से मिल रहे शुरुआती रुझानों के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुशी जाहिर करते हुए विपक्षी दल पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि फाल्टा के नतीजे इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि जब भी जनता को बिना किसी डर या दबाव के स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अनुमति दी जाती है, तब वास्तविक जनभावना और जमीनी हकीकत इसी तरह खुलकर सामने आती है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बांग्ली में पोस्ट साझा करते हुए फाल्टा की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने केवल एक लाख वोटों के अंतर से जीत की अपील की थी, लेकिन जागरूक मतदाताओं ने इस लक्ष्य को पार करते हुए भाजपा को एक अभूतपूर्व जनादेश सौंप दिया है।
मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के माध्यम से जनता का कर्ज चुकाने और एक ‘सुनहरा फाल्टा’ बनाने का संकल्प लिया। इसके साथ ही उन्होंने तृणमूल कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए यह पार्टी एक ‘माफिया कंपनी’ की तरह काम करने लगी थी, जिसने न केवल सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई को लूटकर डराने-धमकाने और आपराधिक गिरोहों की संस्कृति को बढ़ावा दिया। अपने संबोधन में उन्होंने टीएमसी महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की तरफ स्पष्ट इशारा करते हुए एक ऐसे ‘धोखेबाज’ का भी जिक्र किया जिसने किसी समय ‘कमांडर का पद’ हासिल कर लिया था।
फाल्टा विधानसभा सीट पर इससे पहले बीते 29 अप्रैल को मतदान कराया गया था, लेकिन उस दौरान बड़े पैमाने पर चुनावी अनियमितताओं, धांधली और गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे थे। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया और पुराने मतदान को रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश जारी किया था। इसके बाद, 21 मई को केंद्रीय सुरक्षा बलों की बेहद भारी और चाक-चौबंद तैनाती के बीच सभी 285 मतदान केंद्रों (बूथों) पर दोबारा वोट डाले गए थे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के कारण मतदाताओं में भारी उत्साह देखा गया था और इस पुनर्मतदान के दौरान रिकॉर्ड 87 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था, जिसके परिणाम अब भाजपा के पक्ष में एकतरफा ऐतिहासिक जीत के रूप में सामने आए हैं।
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