
लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) तथा पीएम पोषण योजना से जुड़े हजारों कर्मियों और उनके परिवारों को अब बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने इन कर्मियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की प्रक्रिया तेज कर दी है, जिससे उन्हें और उनके परिजनों को इलाज के दौरान आर्थिक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मयोगी कल्याण की अवधारणा के तहत शुरू की जा रही इस पहल का उद्देश्य शिक्षा और पोषण व्यवस्था में योगदान देने वाले कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत कवच प्रदान करना है। सरकार का मानना है कि विद्यालयों और पोषण योजनाओं से जुड़े कर्मियों का सामाजिक और आर्थिक संरक्षण सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि वे पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे सकें।
इस संबंध में शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों, परिषद से मान्यता प्राप्त अनुदानित एवं स्ववित्तपोषित विद्यालयों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों तथा पीएम पोषण योजना से जुड़े पात्र कर्मियों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा।
योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक, सीडब्ल्यूएसएन अनुदेशक, पीएम पोषण योजना के अंतर्गत कार्यरत रसोइया, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के कर्मचारी तथा उनके परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके माध्यम से पात्र लाभार्थी सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना तत्काल भुगतान किए उपचार प्राप्त कर सकेंगे।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और लाभार्थियों के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए 4 जून को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण शिक्षा निदेशक (बेसिक) कार्यालय, लखनऊ में दोपहर 12 बजे से आयोजित होगा। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों और नामित कर्मचारियों को योजना की कार्यप्रणाली, पंजीकरण प्रक्रिया, पात्रता मानदंड और लाभ वितरण संबंधी सभी आवश्यक जानकारियां दी जाएंगी।
बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि वे योजना के संचालन के लिए नोडल कार्मिक नामित करें और उनकी प्रशिक्षण में सहभागिता सुनिश्चित करें। प्रशिक्षण कार्यक्रम को हाइब्रिड मोड में आयोजित किया जाएगा, जिसमें अधिकारी और कर्मचारी वर्चुअल माध्यम से भी शामिल हो सकेंगे। इससे प्रदेश के सभी जनपदों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी।
सरकार का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था और पीएम पोषण योजना से जुड़े कर्मचारी बच्चों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू होने से हजारों कर्मियों और उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा सेवाओं तक आसान पहुंच मिलेगी और आकस्मिक स्वास्थ्य व्यय का बोझ भी कम होगा।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रशिक्षण के बाद पंजीकरण और लाभ वितरण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थी जल्द से जल्द इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकें। सरकार की यह पहल शिक्षा और पोषण व्यवस्था से जुड़े कर्मियों के सामाजिक सुरक्षा दायरे को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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