डीआर कांगो से ड्रॉ के बाद पुर्तगाल पर उठे सवाल, क्या रोनाल्डो पर जरूरत से ज्यादा निर्भर है टीम?

फीफा विश्व कप 2026 में पुर्तगाल को अपने पहले बड़े झटके का सामना करना पड़ा जब टीम को डीआर कांगो के खिलाफ 1-1 की बराबरी पर संतोष करना पड़ा। मुकाबले से पहले पुर्तगाल को स्पष्ट रूप से मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन मैदान पर टीम उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी। इस ड्रॉ के बाद पुर्तगाल की रणनीति, टीम संतुलन और विशेष रूप से क्रिस्टियानो रोनाल्डो पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर नए सिरे से बहस शुरू हो गई है। विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े सितारों में शामिल रोनाल्डो अभी भी टीम का सबसे बड़ा चेहरा हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या पुर्तगाल अब भी पूरी तरह उन्हीं के इर्द-गिर्द खेल रहा है।

मुकाबले के दौरान पुर्तगाल ने गेंद पर नियंत्रण तो बनाए रखा, लेकिन आक्रमण में वह धार दिखाई नहीं दी जिसके लिए यह टीम जानी जाती है। ब्रूनो फर्नांडिस, बर्नार्डो सिल्वा और राफेल लियाओ जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मौजूदगी के बावजूद टीम निर्णायक मौकों को गोल में बदलने में संघर्ष करती नजर आई। कई फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि टीम की आक्रामक रणनीति अभी भी रोनाल्डो-केंद्रित है, जिससे अन्य खिलाड़ियों की स्वाभाविक रचनात्मकता प्रभावित होती है। रोनाल्डो ने अनुभव और नेतृत्व का परिचय जरूर दिया, लेकिन वह मैच का रुख बदलने में सफल नहीं हो सके।

दूसरी ओर डीआर कांगो ने शानदार अनुशासन और सामूहिक खेल का प्रदर्शन किया। अफ्रीकी टीम ने रक्षात्मक रूप से बेहतरीन संगठन दिखाया और पुर्तगाल के हमलों को लगातार विफल किया। उन्होंने यह साबित कर दिया कि आधुनिक फुटबॉल में केवल बड़े नाम ही जीत की गारंटी नहीं हैं। डीआर कांगो ने मौके का फायदा उठाते हुए महत्वपूर्ण अंक हासिल किया और ग्रुप में अपनी दावेदारी को मजबूत किया। इस प्रदर्शन ने उन्हें टूर्नामेंट की संभावित ‘डार्क हॉर्स’ टीमों में शामिल कर दिया है।

पुर्तगाल के लिए यह परिणाम अभी संकट की स्थिति नहीं है, लेकिन निश्चित रूप से एक चेतावनी है। ग्रुप चरण में आगे उज्बेकिस्तान और कोलंबिया जैसी चुनौतीपूर्ण टीमों के खिलाफ मुकाबले बाकी हैं, जहां टीम को अधिक संतुलित और प्रभावी प्रदर्शन करना होगा। कोच रॉबर्टो मार्टिनेज के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह रोनाल्डो के अनुभव का लाभ उठाते हुए टीम को अधिक बहुआयामी बनाएँ। यदि पुर्तगाल को विश्व कप जीतने के अपने सपने को साकार करना है, तो उसे केवल एक खिलाड़ी पर निर्भर रहने के बजाय सामूहिक शक्ति और आधुनिक रणनीति पर अधिक भरोसा करना होगा। यही कारण है कि डीआर कांगो के खिलाफ ड्रॉ के बाद पुर्तगाल और रोनाल्डो का समीकरण एक बार फिर वैश्विक फुटबॉल जगत में चर्चा का विषय बन गया है।

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gaurav singh rajput

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